हर बार अल्फाज ही काफी नहीं होते किसी को समझाने के लिएकई बार कनपटी पे भी देना पड़ता है..
कुछ अल्फ़ाज़ की तरतीब से बनती है शायरी
कुछ चेहरे भी मुकम्मल ग़ज़ल हुआ करते हैं
Tum Mujhe Kabhi Dil Se Kabhi Aankhon Se Pukaaro,
Yeh Hontho Ke Takalluf Toh Zamaane Ke Liye Hain.
उसने कहा चले
जाओ मेरी ज़िन्दगी से,
मेने कहा
कौन हो तुम भाईसाहब!!
😝😝😝😝
गलती से पंखे का बटन क्या
दब गया...
....पूरा परिवार यूँ देखने लग
गया जैसे मैं कोई आतंकवादी
हूँ ..