उसके नैना जैसे नील कमल..
उसका चेहरा जैसे सुबह की किरण..
उस पर ये बाल घनेरी सी..
कर देता है पागल तन मन..
लगता जैसे मैं पिछले जनम से ही उससे मुखातिब हूँ..
शायद लोग तभी कहते ‘आवारा आशिक़’ हूँ.
तेरी यादों की कोई सरहद होती तो अच्छा था
खबर तो रहती….सफर तय कितना करना है
तेरे पास में बैठना भी इबादत
तुझे दूर से देखना भी इबादत …….
न माला, न मंतर, न पूजा, न सजदा
तुझे हर घड़ी सोचना भी इबादत…
मत पूछ कैसे गुज़र रहा है हर पल मेरा तेरे बिना,कभी बात करने की हसरत कभी मिलने की तमन्ना…
बम भोले डमरू वाले शिव का प्यारा नाम है
भक्तो पे दर्श दिखाता हरी का प्यारा नाम है
शिव जी की जिसने दिल से की है पूजा
भगवान् शंकर ने सवारा उसका काम है !