आज की रात भी तन्हा ही कटी
आज के दिन भी अंधेरा होगा
मंजिले आसान सारे मुस्किले वे नूर हो !
दिल की जो हो तम्मना वो हमेशा दूर हो !!
लब पे लब की बात हो, खुशियों में सिमटी जिन्दगी !
गम भरी पारछाइया आँचल से लाखो दूर हो !!
कोई वादा ना कर, कोई ईरादा ना कर!
ख्वाईशो मे खुद को आधा ना कर!
ये देगी उतना ही, जितना लिख दिया खुदा ने!
इस तकदीर से उम्मीद ज़्यादा ना कर!
“जिसे पूजा था हमने वो खुदा तो न बन सका,
हम ईबादत करते करते फकीर हो गए…!!!
हँसते हुए ज़ख्मों को भुलाने लगे हैं हम,हर दर्द के निशान मिटाने लगे हैं हम,अब और कोई ज़ुल्म सताएगा क्या भला,ज़ुल्मों सितम को अब तो सताने लगे हैं हम।