खुशामद गजब है जरा सा रूठ जाने पे,
कैसे संभालोगे खुद को दिल के टूट जाने पे!
बात दिन की नहीं, अब रात से डर लगता है
घर है कच्चा मेरा बरसात से डर लगता है
प्यार को छोड़ कर तुम और कोई बात करो
अब मुझे प्यार की हर बात से डर लगता है
Dil ko teri hi tamanna
Dil ko tujhse hi pyaar
Chahe tu
Aaye ya na aaye
Hum karenge intezar
दिल की धडकने रुक सी गई हैं,
साँसे मेरी धम सी गई हैं.
पुछा हमने दिल के डाक्टर से.
तो पता चला सर्दी के कारण आपकी यादें.
दिल में जम सी गई हैं
बद-नसीबी का मैं कायल तो नहीं हूँ,लेकिन मैंने बरसात में जलते हुए घर देखे है..