मैं नदी तो,
तुम समन्दर हो,
चला कंही से,
पर तुम पर ठहरा हूँ,
मैं चाँद-सा,
रौशन हुआ तेरी रौशनी से,
एहसासो के पर्वतो पे,
तेरे संग चढ़ता हूँ,
मुझे अब अपनी,
पनाहो में जगह दे दो,
मुझे तुमसे,
बे-पनाह मोह्हबत है,
तुम भी थोड़ा सा,
मोह्हबत दे दो "
भरम रखो मोहब्बत का
वफ़ा की शान बन जाओ,
किसी पर जान देदो या
किसी की जान बन जाओ,
तुम्हारे नाम से मुझको
पुकारें ये जहाँ वाले
मैं बन जाऊं अफसाना
और तुम उन्वान बन जाओ।
प्यार मोहब्बत तो सभी करते हैं,दर्द-ए -जुदाई से सभी डरते हैं,हम न तुमसे प्यार करते हैं ना ही मोहब्बत,हम तो बस तुम्हारी एक मुस्कराहट के लिए तरसते हैं।
प्यार मोहब्बत तो सभी करते हैं,
दर्द-ए -जुदाई से सभी डरते हैं,
हम न तुमसे प्यार करते हैं ना ही मोहब्बत,
हम तो बस तुम्हारी एक मुस्कराहट के लिए तरसते हैं।
कितनी जल्दी ये शाम आ गई;
गुड नाईट कहने की बात याद आ गई;
हम तो बैठे थे सितारों की महफ़िल में;
चाँद को देखा तो आपकी याद आ गई.
उनका भी कभी हम दीदार करते है,उनसे भी कभी हम प्यार करते है,क्या करे जो उनको हमारी जरुरत न थी,पर फिर भी हम उनका इंतज़ार करते है..!!