जिसे कोयल समझा वो कौवा निकला,
दोस्ती के नाम पर हौवा निकला,
जो रोकते थे हमें शराब पीने से,
आज उन्हीं की जेब में पौवा निकला।
ना तलवार की धार से ना गोलियों की बौछार से, बंदा डरता है तो सिर्फ अपने बाप की मार से।
न चांद होगा ना तारे होंगे,क्या हम इस साल भी कुंवारे होंगे ,इस दुनिया में कितनों के निकाह हो गए ,क्या हमारे नसीब में सिर्फ निकाह के छुहारे होंगे।
उनकी मुस्कान तो एक अदा है,
जो उसे प्यार समझे वो सबसे बड़ा गधा है।
ऐसी अपनी वाईफ हो,
जींस जिसकी टाईट हो,
चेहरा जिसका व्हाईट हो,
बालों में स्टाईल हो,
होंठों पर स्माइल हो,
इंडिया कि पैदाईश हो,
सास की सेवा जिसकी ख्वाहिश हो,
तो क्या हसीन लाईफ हो।