“कभी – कभी हमसे न जाने किस बात का बदला लेती है
जिंदगी, क्योंकि उसी से दूर रहने की सजा देती है जिंदगी।”
चलो खेलें वही बाजी
जो पुराना खेल है तेरा,
तू फिर से बेवफाई करना
मैं फिर आँसू बहाऊंगा।
हमे बेवफा बोलने वाले
आज तू भी सुनले,
जिनकी फितरत ‘बेवफा’
होती है,
उनके साथ कब ‘वफा’ होती है!!
Apni tanhaayi se tang aa kar..
Bahut se aainey khareed laya hun …
ये वक़्त बेवक़्त मेरे ख्यालों
में आने की आदत छोड़ दो तुम,
कसूर तुम्हारा होता है और
लोग मुझे आवारा समझते हैं