दिल तो पहले होता था सीने में ,
अब तो दर्द लिए फिरते है |
काश हमारा भी कोई रश्के-क़मर होता,
हम भी नजर मिलाते हमें भी मज़ा आता।
कसूर उनका नहीं हमारा
ही था...
हमारी चाहत ही इतनी थी
कि उनको गुरुर आ गया..
मान लिया है मैंने..
नहीं आता मुझे मुहब्बत जाताना..
नादाँ तो तुम भी नहीं..
समझ ना सको शायरियों
में जिक्र तुम्हारा...!!
लबो से चाहत की खुशबू चुराने दो
बहुत हो गया सितम, अब तो पास आने दो..